लेखनी कहानी -09-Dec-2021
गौरव
यादों के झरोखे से......
दीपावली के बाद ही सर्दियों का मौसम शुरू हो जाता है और इसके साथ ही शादियां भी। बुआ सास की बेटी के बेटे का विवाह समारोह इतनी दूर का रिश्ता यही सोचेंगे आप । हां यह रिश्ता दूर का होते हुए भी बहुत करीब है । अमित के बुआ की लड़की के लड़के का विवाह समारोह पास की ही शहर में होना था। जहां हमने पहले से ही एक फ्लैट ले रखा था। वहीं के कालेज में नन्द की बिटिया ने पढ़ाई की थी।
ननद का फोन आया तो रिसीवर रखते हुए सुमन के होठों पर आई लंबी मुस्कान देर तक बरकरार थी। इतनी खुशी तो उसे तब भी नहीं हुई थी। जब वह स्वयं उस एहसास से गुजरी थी। उसने तो कह दिया था वह भी चलेगी उनकी बिटिया के सम्मान समारोह में और वह भी इसके लिए सहर्ष तैयार हो गई। "आखिर हमारी बिटिया आपकी भी तो बिटिया है हम सब मिलकर चलेंगे। "
जब सुमन ने यह बात अमित को यह बताई तो वह भी बहुत प्रसन्न हुए।
वहीं के फ्लैट में हम एकत्र हुए थे। फिर विवाह समारोह में शामिल होने के बाद हम अपनी पर्सनल गाड़ी से गंतव्य की ओर निकल पडे और सफर के दौरान ठंडी हवाओं के साथ मन पुरानी "यादों के झरोखों में जा पहुंचा" ........ विवाह को चार महीना ही हुआ था। पिताजी का फोन आया। मुझे लास्ट ईयर कॉलेज में टॉप करने पर पुरस्कृत किया जा रहा था और सिल्वर मेडल मिलने वाला था तब मैं नहीं जा पाई थी क्योंकि नन्हा अंश गर्भ में आहट देने लगा था और वामिटिंग की वजह से हाल बेहाल था। उस पर ट्रेन का सफर तो जाना मुश्किल लगा। तब मां और पिताजी कॉलेज गए थे। मां के गले में मेडल पहनाया गया और पिताजी को प्रमाण पत्र दिया गया तो तालियों की गड़गड़ाहट के बीच बहुत गर्व महसूस कर रहे थे वे दोनों और मुझे उनके द्वारा सुनाया गया यह वृत्तांत सुनकर दोगुना गर्व हुआ। आखिर माता-पिता ही तो इस पुरस्कार के अधिकारी हैं यह सोच कर। तभी तीव्र हार्न के साथ तंद्रा टूटी और मैं वर्तमान में लौट आई .......सामने बिटिया के कॉलेज गेट पर हमारी गाड़ी रुकी। हम चारों मैं, पतिदेव, ननंद और उनकी बिटिया आर्य कॉलेज के अंदर प्रवेश कर गए ऑडिटोरियम में कुर्सियां लगी हुई थी और सामने मंच पर मुख्य अतिथि हाई कोर्ट जज, कॉलेज के प्रिंसिपल विराजमान थे। स्वागत गीत के पश्चात पुरस्कार वितरण के समय आज जब भतीजी को गोल्ड मेडल के लिए नाम पुकारा गया तो मैं भी वही गौरव महसूस कर रही थी उसे गोल्ड मेडल पहनते हुए देखकर। कॉलेज का माहौल डिसिप्लिन समाप्ति पर राष्ट्रगान जन गण मन जब आरंभ हुआ तो हम सभी पेरेंट्स उसके सम्मान में अपने स्थान पर खड़े हुए। भारत माता की जय के साथ कार्य क्रम का समापन हुआ।
शैलजा
स्वरचित सर्वाधिकार सुरक्षित
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#लेखनी कहानी प्रतियोगिता
Barsha🖤👑
10-Dec-2021 08:25 PM
Nice
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🤫
10-Dec-2021 06:10 PM
बेहतरीन कहानी है आपकी
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Seema Priyadarshini sahay
10-Dec-2021 01:02 AM
Wow great
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